सीकर जिले के रींगस में भारी बारिश ने तबाही मचा दी। ग्वार, बाजरा और मूंग की फसलें अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गईं, जिससे किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है। ग्वार की फसलें सड़ गईं, और जो बचीं है उनमें दाना नहीं पड़ा। हताश किसान अब खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर प्रति बीघा 3-4 हजार का खर्च किसान केशाराम धायल का कहना है- इस बार रींगस में बारिश किसानों के लिए आफत बनकर बरसी। जिससे किसानों की लाखों हैक्टर फसल खराब हो गई। उनके पास रींगस क्षेत्र में 7 बीघा जमीन है। तीन बीघा जमीन में ग्वार की फसल बोई थी और 2 बीघा में बाजरा। बारिश के कारण ग्वार की फसल खराब हो गई। जिसके बाद उसने खेत मे खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया।
किसान का कहना है- फसल बोते समय बुवाई, जुताई, बीज और खाद पर प्रति बीघा 3 से 4 रुपए का खर्च आता है। इसके अलावा निराई-गुड़ाई और मजदूरी का खर्च अलग है। फसल खराब होने के बाद उनकी लागत और मेहनत भी वापस नहीं मिलेगी इसलिए हरी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। वहीं, अब फसल बर्बाद होने के बाद ट्रैक्टर से जुताई का अतिरिक्त खर्च किसानों पर भारी पड़ रहा है। इस दोहरे नुकसान ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। केशाराम धायल और भूदाराम बगड़िया ने सरकार और फसल बीमा कंपनियों से तुरंत सहायता की मांग की है।
उन्होंने कहा कि किसानों को इस संकट से उभारने के लिए तत्काल मुआवजा और बीमा राशि का भुगतान किया जाए। क्योंकि किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों की उम्मीदें टूटी, आर्थिक संकट रींगस के किसानों का कहना है कि इस साल अच्छी फसल की उम्मीद थी। लेकिन अतिवृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया। अब सरकार और बीमा कंपनियों से उम्मीद है। ताकि उनकी मेहनत और लागत का कुछ हिस्सा ही वापस मिल सके। इस बार फसल खराब होने के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा होगा और किसान कर्जदार होंगे।
वन मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का लिया था जायजा वन मंत्री संजय शर्मा ने 7 सितंबर को सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र के माच्छा वाली ढाणी (कोटड़ी धायलान), भवानीपुरा, धीरजपुरा, दांतारामगढ़, सुजावास भुवाला व नेतड़वास गांवों के खेतों में जाकर अतिवृष्टि के कारण हुए फसल नुकसान का जायजा लिया। जिसके बाद वन मंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रभारी मंत्री शर्मा ने अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों और पशुधन के नुकसान का आकलन किया और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा।


