GST 2.0 India: जैसे ही देश में जीएसटी 2.0 लागू हुआ, रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भारी कमी देखी जा रही है। नवरात्रि के पहले दिन से शुरू हुए इस परिवर्तन ने आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम कर दिया है। दूध, ब्रेड, मक्खन, पनीर जैसे दैनिक उपयोग के उत्पाद अब सस्ते हो गए हैं, जिससे गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे एक बचत का उत्सव बताया है। आइए जानें कि किन-किन सामानों पर कितनी बचत होगी।
दूध और डेयरी उत्पादों में बचत
दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों में जीएसटी कटौती के बाद बड़ा फर्क आया है। अब यूएचटी दूध पर जीरो जीएसटी लागू होने से अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने कीमतें घटा दी हैं। 1 लीटर टोंड-ट्रेटा पैक दूध अब 75 रुपये में मिलेगा, जो पहले 77 रुपये का था। इसी तरह, पनीर पर 12% जीएसटी हटने से 200 ग्राम का पैकेट अब 80 रुपये में उपलब्ध होगा। मक्खन की कीमत में भी कमी आई है, जहां 500 ग्राम के पैक पर 20 रुपये की बचत होगी, जिससे यह 285 रुपये में मिलेगा। इन बदलावों से डेयरी उत्पादों की खरीदारी अब और भी किफायती हो गई है।
ब्रेड, पिज्जा और स्नैक्स पर राहत
ब्रेड, पिज्जा और अन्य स्नैक्स पर जीएसटी की दरें घटाई गई हैं, जिससे इनकी कीमतों में भी कमी आई है। ब्रेड अब जीरो जीएसटी के तहत आता है, जिससे इसका पैकेट 19 रुपये में मिलेगा। पिज्जा पर भी 5% से शून्य जीएसटी होने से यह 95 रुपये में उपलब्ध होगा। पास्ता, नूडल्स और कॉर्न फ्लेक्स पर भी टैक्स कम कर 5% कर दिया गया है, जिससे ये उत्पाद सस्ते हो गए हैं। इस बदलाव से खाने-पीने की चीजों पर खर्च कम हुआ है और लोग अधिक बचत कर पा रहे हैं।
मिठाइयां और चॉकलेट्स की कीमतें
त्योहारों के मौसम में मिठाइयां और चॉकलेट्स की कीमतों में भी कमी आई है। अब 50 रुपये की चॉकलेट 44 रुपये में मिलेगी, और 1 किलो लड्डू पर 52 रुपये की बचत होगी। प्रधानमंत्री ने इसे त्योहारों से पहले देशवासियों के लिए एक सुखद समाचार बताया है, जिससे उनकी खर्चों में कटौती होगी। इस निर्णय से मिठाइयों और चॉकलेट्स की खरीदारी अब और भी आकर्षक हो गई है, खासकर त्योहारों के समय।
बच्चों के लिए स्टेशनरी पर छूट
बच्चों की शिक्षा से जुड़े सामानों पर भी सरकार ने जीएसटी घटाया है। पेंसिल, रबर, नोटबुक्स आदि अब टैक्स फ्री हो गए हैं। इससे माता-पिता को बच्चों की पढ़ाई के सामान पर अच्छी-खासी बचत होगी। यह कदम शिक्षा को सस्ता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। स्कूल की जरूरतों को पूरा करना अब और भी सरल हो गया है, जिससे माता-पिता के बजट में भी राहत मिलेगी।
इस बदलाव ने न केवल आम जनता के लिए बड़ी राहत दी है, बल्कि त्योहारों के मौसम में उनके बजट को भी संतुलित किया है। सरकार के इस फैसले से जनता को दैनिक जीवन में आर्थिक रूप से फायदा होगा, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी और खर्च कम होगा। यह कदम देश के आर्थिक विकास में एक सकारात्मक योगदान साबित होगा।


